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*फिल्म समीक्षा: “टू वे”*

*फिल्म समीक्षा: “टू वे”*

लेखक-निर्देशक: विजय खेपड़
निर्माता: राजेन्द्र कुमार वर्मा
बैनर: यश बाबू इंटरटेनमेंट
कलाकार: गुरलीन चोपड़ा, विजय पाटकर, विजय खेपड़, पंकज बैरी, सुधा चन्द्रन, गुलशन पांडे, परी तोमर, दिव्यांशी डे, नेहा वर्मा, अर्चना गोल्डस्मिथ और मिलिन्द गुनाजी

हिंदी फिल्म “टू वे” 13 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह फिल्म एक संवेदनशील और अलग तरह के सामाजिक विषय को उठाने की कोशिश करती है। लेखक-निर्देशक विजय खेपड़ ने इस कहानी के माध्यम से न्याय, संवेदनशीलता और समाज में मौजूद जटिल परिस्थितियों को सामने लाने का प्रयास किया है।
फिल्म की कहानी नूरा के जन्मदिन से शुरू होती है, जहां उसका बॉयफ्रेंड विक्की पार्टी में शामिल होता है। लेकिन इसी पार्टी के दौरान घटनाएं अचानक ऐसा मोड़ लेती हैं, जो पूरी कहानी को गंभीर दिशा में ले जाता है। नूरा की कजिन्स रिंकी, नेहा और कीर्ति के साथ हुई एक विवादित घटना के बाद विक्की न्याय की गुहार लगाता है और मामला अदालत तक पहुंच जाता है। उसके पक्ष में एडवोकेट पन्ना केस लड़ती हैं। आखिरकार सच और न्याय की जीत होती है या नहीं—यह जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखनी होगी।
फिल्म की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज़ में होती है, जहां इंस्पेक्टर हीरा और कांस्टेबल मोती की जोड़ी दर्शकों का मनोरंजन करती है। दोनों की कॉमिक टाइमिंग फिल्म के माहौल को सहज बनाती है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे कोर्टरूम ड्रामा की ओर बढ़ती है और न्याय की जटिल प्रक्रिया को सामने लाती है।
अभिनय की बात करें तो फिल्म में कई कलाकारों ने अपने किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। विजय खेपड़ इंस्पेक्टर हीरा के रूप में और विजय पाटकर कांस्टेबल मोती के रूप में अपनी सहज अभिनय शैली से प्रभावित करते हैं। अभिनेत्री गुरलीन चोपड़ा एडवोकेट पन्ना के किरदार में सशक्त नजर आती हैं।
नए कलाकारों ने भी अपने अभिनय से अच्छा प्रभाव छोड़ा है। नूरा के रूप में अर्चना गोल्डस्मिथ, रिंकी के रूप में दिव्यांशी डे और पन्ना की नौकरानी रोमा के रूप में परी तोमर का अभिनय सराहनीय है। अन्य सहायक कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में संतुलित दिखाई देते हैं।
तकनीकी पक्ष की बात करें तो फिल्म का छायांकन संदीप शिंदे ने किया है। संगीत विशाल शेलके का है, जबकि आर्ट डायरेक्शन महिंदर सिंह और कोरियोग्राफी सनम खोरा ने संभाली है। फिल्म का गीत “कह दो न” भावनात्मक माहौल को खूबसूरती से उभारता है।
करीब दो घंटे बीस मिनट की यह फिल्म एक अलग विषय पर आधारित है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। सीमित पब्लिसिटी के बावजूद फिल्म ने अपने विषय और कलाकारों के प्रयासों से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है।
फिल्म फिलहाल मुंबई के मूवी टाइम सहित देश के कुछ चुनिंदा शहरों में सीमित शो के साथ प्रदर्शित की जा रही है। उम्मीद की जा सकती है कि दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ने के साथ यह फिल्म अपनी अलग पहचान बनाने में सफल होगी।
कुल मिलाकर “टू वे” एक संवेदनशील विषय को उठाने वाली फिल्म है, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज के एक महत्वपूर्ण पहलू पर विचार करने का अवसर भी देती है।

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